The Poet Within
Friday, July 20, 2012
प्रश्न
संयोग उपज
जीवन यह क्षण भर
बिंदुओं का संघात
निरर्थक!
अथवा निहित प्रयोजन
व्यापक!
सत्य जगत;
कष्ट; परमार्थ!
सत्य मैं!
या सब असत्य!
प्रश्न रहा हूँ
प्रश्न रहूँगा
मैं;
मुझ संग सर्वस्व.
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