Thursday, April 11, 2013

प्यास


ट्यूबवेल से बोली मैना
अब तो तू चुप चाप ही रहना
बहुत हो चुकी मेरी प्रतीक्षा
चरम गई पानी की इच्छा
अब मैं अपनी राह गढूंगी
स्व-बलिदान से नहीं डरूँगी
नभ तो पर से नाप चुकी हूँ
चोंच चला धरती खोदूंगी
नीत भुला मानव बैठा है
नव युग की मैं नीत बनूँगी |

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