आकर्षण का नियम कहता है
होती है पूरी हर इच्छा
जिसमें हों तीव्रता
और निरंतरता.
उन बेसहारों की चाह में
क्या कम होती है
तीव्रता
जो करते हैं
चाह रोटी की,
चाह छाँव की,
चाह हमदर्दी की?
क्या कम होती है
इन चाहों में निरंतरता,
दृढ़ता?
क्यों नहीं होती पूरी
चाहें असहायों की?
क्या होता है आकर्षण का
नियम भी
वर्गभेदी?