Sunday, May 5, 2013

आकर्षण का नियम


आकर्षण का नियम कहता है
होती है पूरी हर इच्छा
जिसमें हों तीव्रता
और निरंतरता.
उन बेसहारों की चाह में
क्या कम होती है तीव्रता
जो करते हैं
चाह रोटी की,
चाह छाँव की,
चाह हमदर्दी की?
क्या कम होती है
इन चाहों में निरंतरता, दृढ़ता?
क्यों नहीं होती पूरी
चाहें असहायों की?
क्या होता है आकर्षण का नियम भी
वर्गभेदी?

चमक


खिड़की के बाहर झाँक कर देखा
बूढ़े तालाब की सतह पर
चमकते हुए अनगिनत बिंदु.
सोचा, तारे तो नहीं!
वे तो रात में चमकते हैं!
जुगनू भी नहीं,
अभी तो भरी दुपहरी है!
क्या पानी की चमक है यह?
लहरों में हिल-डोलकर
सूरज से होड़ लगाती
उसी की रश्मियों को पलटाती
और बिखेरती
अपनी शीतलता की चमक.
क्या किसी ने देखी
मेरी आँखों में भी
होड़ की, रश्मियों की,
और शीतलता की चमक?