Tuesday, April 23, 2013

मेरा परिचय


गुमशुदा
खुद की तलाश में.
अंतस में डुबकी
ऊँचाई की आस में.
निरंतर बिना उत्तर
एक प्रश्न
मेरा अस्तित्व.

वह भगवान बनाती


प्लेटफोर्म पर थी वो
फिरती इधर-उधर
अपने हाथ फैलाये
भगवान के नाम पर मांगती.
उस भगवान के नाम पर
जिसने उसे बनाया
या फिर उस भगवान के नाम पर
जिसे उसने बनाया !
उसके चेहरे पर झुर्रियाँ थीं
या झुर्रियों में चेहरा !
जो भी हों, थे दोनों.
वरना बिना झुर्रियों के भी चेहरा होता है
तभी तो आइने बिकते हैं दुनिया में.
और बिना चेहरे के भी झुर्रियाँ होती हैं.
नहीं आता यकीन, तो झाँक लो
लोगों के दिलों में,
जहाँ अब चेहरे नहीं मिलते
मिलती हैं सिर्फ झुर्रियाँ.
मुझसे भी माँगा उसने
मैंने भी उसे एक रूपया दिया
और उस क्षण में उसका भगवान बन गया.
वह फिर बढ़ गई
अपने अगले भगवान कि तलाश में
फिरती इधर-उधर
अपने हाथ फैलाये
उसी प्लेटफोर्म पर
लोगों को भगवान बनाती.

Thursday, April 11, 2013

प्यास


ट्यूबवेल से बोली मैना
अब तो तू चुप चाप ही रहना
बहुत हो चुकी मेरी प्रतीक्षा
चरम गई पानी की इच्छा
अब मैं अपनी राह गढूंगी
स्व-बलिदान से नहीं डरूँगी
नभ तो पर से नाप चुकी हूँ
चोंच चला धरती खोदूंगी
नीत भुला मानव बैठा है
नव युग की मैं नीत बनूँगी |